Monday, 31 October 2011

Gazal,...

खुश्क है मौज हर पल ख़ामोशी यहाँ ,
इस वीराने में कैसे गुज़ारा करेंगे ,
मौन ही मौन दर्पण दरकने लगे ,
कौन हमदम है किसको पुकारा करेंगे , 
...............खुश्क है मौज हर पल ख़ामोशी यहाँ ,

जब सितारे भी रंगत बदलने लगे , 
आग लग जाये गर जिंदगी में कही , 
हम तो जलते रहे है शमा की तरह ,
कैसे जीवन में अपने उजाला करेंगे , 
..................खुश्क है मौज हर पल ख़ामोशी यहाँ ,

देखना ही अगर है निहारो मुझे , 
दम से बे- दम हुआ मै तुम्हे क्या खबर ,
ऐसे रंजिस सहारे क्या जीवन चले ,
दो सहारा अगर खुद से हारा करेंगे ,
..................खुश्क है मौज हर पल ख़ामोशी यहाँ ,

वक़्त उलझन बने हम परेशा रहे , 
और तमन्नाये ऐसी ही घुटती रही ,
किस तरह हम तुम्हारी इबादत करे ,
कैसे सिजदे में सर ये झुकाया करेंगे ,
..................खुश्क है मौज हर पल ख़ामोशी यहाँ ,